Saturday, February 11, 2012

The review petition was filed by Dr Hamidullah Bhat who was not only notorious for his association with the RSS but was also implicated and arrested by the CBI in the corruption case in 2005. Because of the indecisiveness of the Central government which is apparent in every decision of UPA-I and UPA-II. Dr Bhat also continued in the service. Mr Jawaid Rahmani, an Urdu scholar had filed a petition a PIL in 2011 which was disposed off by the Division bench of the High Court on 09.12.2011. The High Court bench held that; 1. It is pleaded that the respondents/review applicants without complying with the judgment (in as much as the respondent no.2 has already attained the age of 58 years but is still continuing as the Director of the respondent no.3 NCPUL) cannot seek review thereof; that the respondent no. 2 was the first Director of the respondent no.3 NCPUL and was not engaged under the Central Government Fundamental Service Rules applicable to the other employees of the respondent no.3 NCPUL but was engaged on special terms & conditions setting his age of retirement as 58 years and would thus remain unaffected by the amendment in the FSR enhancing the age of retirement from 58 years to 60 years; that even otherwise as per the subsequent Recruitment rules framed in the year 2006 for the post of Director, the tenure of Director is to be of three years only; that the minutes aforesaid of the meeting of the Executive Board do not apply to the post of Director; that though the documents filed along with the review application were not part of the pleadings but had been referred to at the time of hearing of the writ petition. 2. Direction to CBI to file the complete investigation report in RC 50/2005 within 10 weeks of today 3. Direction to Ministry of HRD regarding pending departmental inquiry since 2008 to pass an order in the departmental proceedings initiated against Bhat within six weeks. Dr Bhat filed a review petition before the High Court on 20.12.2011 which was dismissed saying "No ground for review is made out.Dismissed."


دہلی ہائی کورٹ نے حمید الله بھٹ کی بر طرفی کے فیصلے کو برقرار رکھا
بھٹ کی قومی اردو کونسل کی اور حکومت ہند کی ریویو کی درخواست خارج
نئی دہلی ، 11فروری 2012 :قومی اردو کونسل کے ڈائریکٹر حمید الله بھٹ پر اپنے عہدے کے ناجائز استعمال کا الزام عائد کرتے ہوئے نو جوان نقاد جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن نے دہلی ہائی کورٹ میں  PILداخل کر کے اسکو قومی اردو کونسل سے باہر کرنے کا مطالبہ کیا تھا .انہوں نے یہ بھی دعویٰ کیا تھا کہ بھٹ اس عہدے کے لائق نہیں تھا اور اس کی تقرری غلط طریقے سے کی گئی تھی .اور بھٹ پر پہلے بھی کشمیر یونیورسٹی اور جامعہ ہمدرد میں بد عنوانی کے چارجز لگے .جس کی تفصیل اس نے وزارت براے فروغ انسانی وسائل کو فراہم نہیں کی تھی .انہوں نے عدالت عالیہ کو یہ بھی بتایا کہ بھٹ نے پہلے دن سے قومی اردو کونسل کا استحصال کیا اور 2005 میں  CBIنے اس کو گرفتار بھی کیا تھا اور وہ مقدمہ ابھی تک باقی ہے اور اسے دبا یا گیا ہے .یہ PIL فروری  2011میں داخل کی گئی تھی.اور کئی سماعتوں کے بعد اس پر 9 دسمبر  2011کو فیصلہ ہوا      اور اس فیصلے میں دہلی ہائی کورٹ نے تسلیم کیا کہ بھٹ کا تقرر اب سے پندرہ برس پہلے بھی غلط ہوا تھا (صفحہ نمبر 14) W.P.(C)NO.857/2011  اور دہلی ہائی کورٹ نے اس کو اسی دن سے ہٹادینے کا حکم دیا جس دن اس کی عمر 58 سال ہو گئی ہو .جبکہ ابھی اس کی عمر تقریباً  59سال ہے.اور ہائی کورٹ نے  CBIکو حکم دیا کہ CBIنے جس کیس میں اسے گرفتار کیا تھا اس کی انکوائری دوبارہ اور مکمل کرے اور دس ہفتوں کے اندر اپنی انکوائری کو مکمل کرے اور وزارت براے فروغ انسانی وسائل کے ویجیلنس سیکشن میں بھی اسکے خلاف ایک انکوائری پینڈنگ میں کئی برسوں سے ہے اور اسکے بارے میں جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن نے یہ اندیشہ ظاہر کیا کہ بنام انکوائری وہ خانہ پری محض ہے اور وہ بھٹ کے ریٹائر ہونے کا انتظار کر رہی ہے ،اسی لئے اس نے اتنے برسوں میں کچھ نہیں کیا .ان کے اس اندیشے کی روشنی میں عدالت عالیہ نے اس ویجیلنس سیکشن کو حکم دیا کہ وہ 6 ہفتوں کے اندر اپنی انکوائری مکمل کر کے کاروائی کرے .یہ فیصلہ 9دسمبر 2011 کو آیا تھا جسکے بارے میں ایک اردو اخبار میں گمراہ کن بیان چھپوا کر بھٹ نے یہ تاثر دینے کی کوشش کی کہ یہ فیصلہ اس کے خلاف نہیں ہے .اور دوسری طرف اس نے قومی اردو کونسل سے ریویو اپلی کیشن ہائی کورٹ میں 20دسمبر 2011کو ڈلوا کر اس فیصلے پر نظر ثانی کی درخواست کی اور پھر اپنی طرف سے بھی ریویو اپلیکیشن ڈالی اور وزارت براے فروغ انسانی وسائل سے بھی ڈلوائی .ان درخواستوں پر بحث 20جنوری  2012کو ہوئی تھی مگر عدالت عالیہ نے اس دن کوئی فیصلہ نہیں سنایا تھا .وہ فیصلہ آج آ گیا جس میں دہلی ہائی کورٹ نے ریویو اپلکیشنوں کو خارج کر دیا اور کہا کہ ان میں عدالت سے جن بنیادوں پر نظر ثانی کی درخواست کی گئی ہے ان پر غور کرنے کے بعد ہی ہم نے فیصلہ سنایا تھا چنانچہ یہ درخواست رد کی جاتی ہے اور ہم نے جو فیصلہ 9 دسمبر2011  کو دیا ہے اس میں کسی قسم کے رد و بدل کی کوئی گنجائش ہے نہ ضرورت .دہلی ہائی کورٹ کے اس فیصلے کا پروفیسر لطف الرحمن اور جناب جاوید رحمانی نے خیر مقدم کیا اور کہا کہ دہلی ہائی کورٹ کے ایسے صاف فیصلے پر  قومی اردو کونسل اور وزارت براے فروغ انسانی وسائل کی طرف سے جو ریویو اپلی کیشن ڈلوائی گئی تھی وہ بنیادی طور پر ٹیکس پیئر کے پیسے کے غلط استعمال کی بھونڈی مثال تھی جس کی تلافی اس کیلئے ذمہ دار افسروں اور کلرکوں کی سیلری سے کروائی جانی چاہیے کیونکہ ہائی کورٹ نے بھٹ کو نا اہل اور اپنی مدت کار سے زیادہ عرصے تک کسی عوامی عہدے پر قابض رہنے کا مجرم پایا اور اسے ہٹانے کو کہا تو اس فیصلے پر ریویو کی درخواست وہ تو کر سکتا ہے مگر ادارہ یعنی   NCPUL کیسے کر سکتا ہے .اردو کونسل کی طرف سے جو ریویو اپلی کیشن ڈالی گئی تھی ایک مجرم کے دفاع میں اسکو ہائی کورٹ نے تو رد کر ہی دیا ہے مگر اردو والوں کو بھی اس کا حساب قومی اردو کونسل کے ایک ایک ذمہ دار سے مانگنا چاہیے .
رابطہ عامہ سیل 
محمدسمیع الدین 


نوٹ :اس بارے میں مزید معلومات دہلی میں جناب جاوید رحمانی سے اس نمبر09210293686 پر اور پٹنہ میں پروفیسر لطف الرحمان سے اس نمبر09835064584 پر فون کرکے حاصل کی جا سکتی ہیں .

भट्ट को उर्दू काउन्सिल के निर्देशक के पद से हटाने का अपना फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा
भारत सरकार ,कौमी उर्दू काउन्सिल और भट्ट की वह अर्जी ख़ारिज कर दी गई जिस में उच्च न्यायालय से अपने फैसले पर पुनर्विचार की अपील की गई थी
नयी दिल्ली , 11 फ़रवरी  2012: दिल्ली उच्च न्यायलय ने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था कौमी उर्दू काउन्सिल के दागी निर्देशक हमीदुल्लाह भट्ट के बचाव में दाखिल की गई भारत सरकार और कौमी उर्दू काउन्सिल (NCPUL) और हमीदुल्लाह भट्ट के अधिवक्ताओं की वह अर्जी ख़ारिज कर दी जिस में दिल्ली उच्च न्यायलय से अपने फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया था !दिल्ली उच्च न्यायलय ने उर्दू के प्रसिद्ध कवी एवं आलोचक प्रोफ़ेसर लुतफुर रहमान (पूर्व मंत्री ,बिहार सरकार )और प्रसिद्ध युवा आलोचक एवं कवी श्री जावेद रहमानी(प्रसिद्ध किताब ग़ालिब तनक़ीद के लेखक ) द्वारा दायर जन हित याचिका पर 09 दिसंबर 2011 को फैसला दिया था कि भट्ट को कौमी उर्दू काउन्सिल के निर्देशक के पद से तुरंत हटा दिया जाये क्योंकि वह उस पद पर रहने का उसी दिन से योग्य नहीं जिस दिन उसकी आयु  58 साल से ज्यादा हो गई ,और इस समय उस की आयु 59 साल है ,और उस के खिलाफ CBI का एक केस भी आय से अधिक सम्पति अर्जित करने का चल रहा है जिस केस में उस को CBI ने2005 में गिरफ्तार भी किया था और लगभग दो हफ्ते तक वह जेल में रहा .इस जन हित याचिका पर फैसला देते हुए उच्च न्यायलय ने जन हित याचिका कर्ताओं के अधिवक्ता श्री अर्जुन हर्कावली द्वारा पेश किये गए सबूतों के आधार पर यह भी माना कि 1997 में जब भट्ट को उर्दू काउन्सिल का निर्देशक नियुक्त किया गया तब भी इसकी नियुक्ति अवैध रूप से की गई और इस से अधिक योग्य उम्मीदवारों को छोड़ कर इस को नियुक्त किया गया ,मगर अब चूंकि इसकी नियुक्ति को 15 साल से ज्यादा वक़्त गुज़र गया अतः उस को न्यायलय छेड़ना नहीं चाहता !भट्ट को जब कौमी उर्दू काउन्सिल का निर्देशक बनाया गया उस से पहले भी भट्ट को कश्मीर विश्वविध्यालय और हमदर्द विश्वविध्यालय से भ्रष्टाचार के आरोप में निकाला गया था और फिर उस ने अपनी नियुक्ति जामिया मिल्लिया इस्लामिया में करवाई और पहले से निचले पद पर तो जैसे ही समाचारपत्रों में इसकी जामिया में नियुक्ति की खबर प्रकाशित हुई जामिया के छात्रों एवं अध्यापकों ने कुलपति कार्यालय का घेराव किया और इसकी नियुक्ति रद्द कर दी गई !उस के बाद भी यह जब कौमी उर्दू काउन्सिल में आया तो पहले दिन से इस ने उस संस्था और उस संस्था के कर्मचारियों का शोषन किया और 2005 में इस को CBI ने बड़ी रक़म और आय से कई गुना अधिक सम्पति के साथ गिरफ्तार किया !जेल से छूटने के बाद यह कौमी उर्दू काउन्सिल में वापसी केलिए निरंतर जतन करता रहा और 28 अप्रील 2009 को दोबारा कौमी उर्दू काउन्सिल आ गया !इसके आते ही उर्दू वालों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता श्री गौहर रज़ा ने और श्रीमती शबनम हाश्मी ने कौमी उर्दू काउन्सिल की तमाम कमेटियों से त्यागपत्र दे दिया और मानव संसाधन विकास मंत्री श्री कपिल सिब्बल को पत्र लिखा कि उनके त्यागपत्र का कारण भट्ट की NCPUL में वापसी है क्योंकि मैं किसी मुजरिम के साथ काम नहीं कर सकता और मुजरिम भी ऐसा जो अपने जुर्म पर शर्मिंदा न हो बल्कि अपने जुर्म को अपनी क्वालिटी समझता हो !फिर उर्दू के प्रसिद्ध आलोचक प्रोफ़ेसर शमीम हनफी ने भी NCPUL की तमाम कमेटियों से इस्तीफा दे दिया और कारण इस भ्रष्ट की वापसी को बताया मगर श्री कपिल सिब्बल के दफ्तर में पूरानी दिल्ली के जो क्लर्क हैं वह भट्ट की खाते और श्री सिब्बल को समझाते रहे कि सब ठीक है ,और यह आदमी सबसे लायक है !और श्री सिब्बल ने भी सोचा होगा कि जो व्यक्ति सरकारी पैसों से मुरली मनोहर जोशी को "उर्दू और हिंदी के माथे की बिंदी" बना चूका है उस के पालने से यह फ़ायदा है कि साठ लाख रूपये NCPUL से सालाना  ETV URDU को देकर वह अपने  और श्री सिब्बल बड़े बड़े फोटो और वीडियो हर हफ्ते चलवाता है ,फिर संस्था की मासिक पत्रिका उर्दू दुनिया में हर जगह उनके फोटो लगवाता है,इसके यह सब करने से शायद मैं भी उर्दू और हिंदी के कानों का झूमर बन जाऊंगा !और भ्रष्टाचार तो सिब्बल केलिए कभी  कोई मसला रहा ही नहीं !अतः सारी उर्दू दुनिया दुहार लगाती रही और यह उर्दू काउन्सिल में मनमानी करता रहा और मानव संसाधन विकास मंत्री ऐसी गहरी नींद सोते रहे कि उन्हें दो दर्जन सांसदों ने भी एक नहीं दो दो पत्र लिखा उर्दू काउन्सिल से तुरंत हटाने केलिए ,मगर श्री सिब्बल की नींद टूटी ही नहीं ! तब फ़रवरी 2011 में श्री जावेद रहमानी और प्रोफ़ेसर लुतफुर रहमान ने दिल्ली उच्च न्यायलय में जन हित याचिका दायर की !और भट्ट नामी इस गुण्डे की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी थी कि 9 फ़रवरी 2011 को उच्च न्यायलय ने नोटिस भेजी जिसकी खबर 10 फ़रवरी 2011 को अख़बारों में छपी और 12 फ़रवरी2011 को इसने जन हित याचिका कर्ता श्री जावेद रहमानी पर हमला कर दिया जिसकी रिपोर्ट सरिता विहार पुलिस स्टेशन में दर्ज है ! और उस पर पुलिस ने आज तक कुछ नहीं किया मगर याचिका कर्ताओं ने हिम्मत नहीं हारी और जन हित याचिका पर बहस होती रही और 9 दिसंबर 2011 को उच्च न्यायलय ने आदेश दिया कि भट्ट को कौमी उर्दू काउन्सिल का निर्देशक बने रहने का कोई हक नहीं ,उसे हटाया जाये और CBI को निर्देशa दिया कि वह केस नंबर  RC 50/2005 ,जिसके अंतर्गत भट्ट गिरफ्तार हुआ था ,की complete investigation report 10 हफ्ते के अन्दर file करे और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के Vigilance सेक्शन में भी एक केस इसके खिलाफ पेंडिंग में था ,उसके विषय में मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह 6 हफ्ते के अन्दर अपनी Investigation मोकम्मल करके उचित कारवाई करे !यह फैसला आने पर पहले तो भट्ट ने उर्दू के एक समाचारपत्र में अपना यह बयान छपवाया कि "यह फैसला मेरे हक में है...और दुनिया का कोई कानून मुझे 60 साल से पहले यहाँ से नहीं हटा सकता "और फिर कौमी उर्दू काउन्सिल की तरफ से उच्च न्यायलय में फैसले पर पुनर्विचार की अर्जी दाखिल कारवाई ,और फिर अपनी तरफ से एक अर्जी दाखिल की और फिर मंत्रालय के कुछ अपने जैसे भ्रष्ट लोगों की मदद से मंत्रालय की तरफ से भी पुनर्विचार की अर्जी दाखिल कारवाई !जिन पर 20जनवरी 2012 को बहस हुई जिसको  Acting Chief Justice A K Sikri और  Justice Rajiv Sahai Endlaw  की   Division Bench ने सुना मगर उस वक़्त अपना फैसला नहीं सुनाया और वह फैसला आज आया जिस में पुनर्विचार की अर्जियों को ख़ारिज कर दिया गया और Acting Chief Justice A K Sikri और  Justice Rajiv Sahai Endlaw ने अपने फैसले में साफ़ कहा कि हम ने अपने फैसले में उन तमाम पहलूओं पर गौर करने के बाद  ही फैसला दिया था जिन पर गौर करने केलिए इन Review Applications में कहा गया है और पूरी बहस सुनने और तमाम  Documents को देखने के बाद फैसले पर Review की कोई ज़रुरत हम महसूस नहीं करते .अब जबकि उच्च न्यायलय ने पूरी तरह वजाहत कर दी है तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय को उच्च न्यायलय का सम्मान करते हुए तुरंत हमीदुल्लाह भट्ट को निकाल बाहर करना चाहिए ताकि यह भ्रष्ट व्यक्ति हमारे मानव संसाधन विकास मंत्री और कांग्रेस की एक तरफ तो भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने की बात करने और दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने केलिए किसी भी हद तक जाने की फितरत को सब पर ज़ाहिर करने का सामान न बन जाये !यह मुसीबत अभी ज्यादा बड़ी इसलिए भी बन सकती है कि कई राज्यों के चुनाव अभी सर पर हैं  

  


Friday, December 9, 2011

In a PIL, one Jawaid Rahmani had sought the court's direction to the Centre to sack Bhat because he was overage, and faced a CBI probe for disproportionate assets:The Indian Express Delhi


Ruling on a petition seeking his removal,a Division Bench of Acting Chief Justice A K Sikri and Justice Rajiv Sahai Endlaw held that Bhat could not head NCPUL because he was overage and faced a corruption case.

دہلی ہائی کورٹ نے حمید الله بھٹ کو قومی اردو کونسل سے ہٹانے کا حکم دیا 
یہ انصاف کی اور اردو کی جیت ہے صرف میری یا جاوید رحمانی کی نہیں  :پروفیسر لطف الرحمان 
نئی  دہلی ،9 دسمبر  2011:قومی اردو کونسل کے موجودہ داغی ڈائریکٹر حمید الله بھٹ کو دہلی ہائی کورٹ نے اسکے عھدے سے ہٹانے کا حکم دیا اور کہا کہ اس عھدے پر وہ58 سال کی عمر تک ہی  رہ سکتا ہے واضح رہے کہ ابھی اسکی عمر 59 سال سے زیادہ ہے .اسی کے ساتھ دہلی ہائی کورٹ نے CBI کو بھی حکم دیا کہ اسکے خلاف بد عنوانی کا جو معاملہ اس نے درج کیا تھا  اس کی پوری چھان بین کرکے دس ہفتے کے اندر عدالت میں کلوزر رپورٹ  داخل کرے واضح رہے کہ ایچ بھٹ کو CBI نے2005 میں گرفتار کیا تھا مگر جب یہ2009 میں اسی عھدے پر دوبارہ بحال ہونے میں کامیاب ہو گیا تو اپنے سیاسی اثر و رسوخ کا فائدہ اٹھا کر اس نے وہ کیسسرد بستے میں ڈلوا دیا تھا .جسکی پھر سے با ضابطہ انکوائری کا عدالت عالیہ نے حکم دیا .اسی کے ساتھ اسکے خلاف وزارت براے فروغ انسانی وسائل میں بھی ایک انکوائری چل رہی تھی .اسکے بارے میں ہائی کورٹ نے وزارت سے کہا کہ دس ہفتے میں اس پر اپنی رپورٹ داخل کرے اور یہ بھی بتاے کہ اسکے خلاف کیا کاروائی کی گئی .ڈاکٹر ایچ بھٹ کے خلاف پروفیسر لطف الرحمان اور جناب جاوید رحمانی نے فروری2011 میں ایکPIL دہلی ہائی کورٹ میں داخل کی تھی .جس میں اس کے پورے داغ داغ کیریئر کا حوالہ دیکر اسکو بر طرف کرنے کا مطالبہ کیا گیا تھا .جس پر جب دہلی ہائی کورٹ نے حکومت سے جواب طلب کیا تو ملزم مسٹر ایچ بھٹ نے جناب جاوید رحمانی پر حملہ بھی کیا اور انھیں قومی اردو کونسل سے نکالنے کی کوشش بھی کی .اسکے باوجود بہر حال دہلی ہائی کورٹ میں اسPIL پرسماعتوں کا سلسلہ جاری رہا . 4 نومبر 2011 کی سماعت میں دہلی ہائی کورٹ کی دو رکنی بنچ نے سرکاری وکیل سے ایفی دوٹ مع آفس آرڈر داخل کرکے بتانے کو کہا تھا کہ جب ملزم ایچ بھٹ کی تقری کے آرڈر میں درج ہے کہ وہ ریٹائر 58 سال کی  عمر میں ہوگا تو وہ ابھی تک یہاں کیا کر رہا ہے ؟ اس سماعت میں سرکاری وکیل نے ایفی دوٹ تو داخل کیا تھا مگر کوئی ٹھوس قانونی جواز اسکی وہاں موجودگی کا نہیں پیش کر سکا اور نہ اسکا دفاع بد عنوانی کے معاملات میں کر پایا .اس ایفی دوٹ پر اسکے با وجود سرکاری وکیل اور جناب جاوید رحمانی کے وکیل شری ارجن حرکاولی (Arjun Harkauli)کے درمیان بحث ہوئی .جسکو سننے کے بعد ایکٹنگ چیف جسٹس جسٹس راجیو سہائے نے اپنا فیصلہ محفوظ رکھا تھا جو آج دیا گیا جسکے تحت جسٹس راجیو سہائے نے مذکورہ بالا ہدایات وزارت براے فروغ انسانی وسائل ،حکومت ہند کو اور سی بی آئ (CBI)کو دیں .پروفیسر لطف الرحمان اور جناب جاوید رحمانی نے اس فیصلے کا خیر مقدم کیا اور کہا کہ یہ انصاف کی اور اردو کی جیت ہے جس سے اردو مخالف قوتوں کو سبق لینا چاہیے خواہ وہ اردو اداروں کے اندر ہوں یا باہر .پروفیسر لطف الرحمن نے یہ بھی کہا کہ یہ اردو کی سیاست کے ایک تاریک عھد کا خاتمہ ہے جسکا خیر مقدم ہمارے وزیر براے فروغ انسانی وسائل کپل سبل صاحب کو بھی کرنا چاہیے اور انھیں اس شخص کو ترنت معطل کرنے کے ساتھ ہی یہ عھد بھی کرنا چاہیے کہ آئندہ انکی موجودگی میں ایسے افراد اردو اداروں پر مسلط نہ ہونگے .

نوٹ :اس بارے میں مزید معلومات دہلی میں جناب جاوید رحمانی سے اس نمبر09210293686 پر اور پٹنہ میں پروفیسر لطف الرحمان سے اس نمبر09835064584 پر فون کرکے حاصل کی جا سکتی ہیں .
 سمیع الدین
 رابطہ عامہ سیل -

Sunday, November 20, 2011

Arguments heard. Order reserved.


 عدالت عالیہ کے ججوں نے بھٹ کی برطرفی سے متعلق بحث سن کر اپنا فیصلہ محفوظ رکھا 
نئی  دہلی ،9 نومبر 2011: 4 نومبر 2011 کی سماعت میں دہلی ہائی کورٹ کی دو رکنی بنچ نے سرکاری وکیل سے ایفی دوٹ مع آفس آرڈر داخل کرکے بتانے کو کہا تھا کہ جب ملزم ایچ بھٹ کی تقری کے آرڈر میں درج ہے کہ وہ ریٹائر 58 سال کی  عمر میں ہوگا تو وہ ابھی تک یہاں کیا کر رہا ہے ؟ اس سماعت میں سرکاری وکیل نے ایفی دوٹ تو داخل کیا مگر کوئی آفس آرڈر اور قانونی دلیل نہیں پیش کر سکے .اسکے بعد سرکاری وکیل اور جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن کے وکیل جناب ارجن ہرکولی کے درمیان زبردست بحث ہوئی جس کو ہائی کورٹ کی دو رکنی بنچ نے بغور سنا اور اپنا فیصلہ محفوظ رکھا جو یقین ہے کہ بہت جلد سنایا جائیگا اور ایچ بھٹ کو قومی اردو کونسل سے نکال باہر کیا جائیگا .  
http://delhihighcourt.nic.in/dhcqrydisp_o.asp?pn=236196&yr=2011

Saturday, November 5, 2011


حمید الله بھٹ کی برطرفی سے متعلق PIL کی سماعت کے دوران طویل بحث

اگلی سماعت 9 نومبر 2011 کو ،جج نے حکومت سے ایفی دیفٹ (Affidavit)داخل کرنے کو کہا
نئی دہلی :4 نومبر 2011 : حمید الله بھٹ کی برطرفی کے سوال پر داخل جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن کی PIL پر آج سماعت ہوئی جس میں دونوں فریقین کے وکیلوں کے درمیان زبردست بحث ہوئی اور جج نے سرکاری وکیل سے پوچھا کہ جب حمید الله بھٹ کی تقرری کے آفس آرڈر میں صاف لکھا ہے کہ اس کا تقرر پانچ سال کیلئے کیا جاتا ہے یا اس وقت تک کیلئے جب تک اسکی عمر58 سال کی ہو جائے ،تو یہ ابھی تک قومی اردو کونسل میں کیوں ہے ؟تو سرکاری وکیل سے اسکا کوئی جواب نہ بن پڑا.چنانچہ دہلی  ہائی کورٹ کے ججوں کی دو رکنی بنچ نے سرکاری وکیل کو حکم دیا کہ اس بات کی وضاحت کیلئے ایفی دیفٹ داخل کریں اور اگلی سماعت 9 نومبر 2011 کو رکھی .واضح رہے کہ قومی اردو کونسل کے موجودہ ڈائریکٹر حمید الله بھٹ کے   خلاف یہ PIL جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن نے دہلی ہائی کورٹ میں داخل کی تھی جس پر 9 فروری 2011 کو کورٹ نے نوٹس جاری کیا جس کے بعد حمید الله بھٹ نے جناب جاوید رحمانی پر حملہ بھی کیا اور 12 فروری 2011 کو  فروغ اردو بھون میں دونوں کے درمیان زبردست ہاتھا پائی ہوئی ،جس کی رپورٹ بھی جناب جاوید رحمانی نے سریتا وہار پولیس اسٹیشن میں اسی دن درج کرا دی تھی .اس PIL میں انہوں نے حمید الله بھٹ کی اہلیت پر سوالیہ نشان قائم کیا اور کہا ہے کہ 1997 میں جب اسکو قومی اردو کونسل کا ڈائریکٹر بنایا گیا اس وقت بھی تعلیمی  اہلیت کے اعتبار سے یہ اس عہدے کا اہل نہیں تھا اور وزارت براے فروغ انسانی وسائل نے اس کا تقرر  بغیر کسی Recruitment Rules کے بھی کیا جو غیر آئینی ہے اور اس سے پہلے اس پر کشمیر یونیورسٹی اور جامعہ ہمدرد میں بد عنوانی کے الزامات لگ چکے تھے اور یہ ان جگہوں سے نکالا جا چکا تھا .اور 1995 میں اسکو جامعہ ملیہ اسلامیہ میں OSD بنایا گیا تو بد عنوانی کے معاملے میں اس کی شہرت کا یہ عالم تھا کہ جامعہ کمیونٹی نے زبردست احتجاج کیا اور اسکو جوائن Join نہیں کرنے دیا گیا .ان سب حقائق کو نظر انداز کر کے وزارت براے فروغ انسانی وسائل کی سیلکشن کمیٹی نے شمس الرحمن فاروقی کی ایما پر قومی اردو کونسل کے ڈائریکٹر کے لئے بے غیر انٹرویو کے تین لوگوں کے ناموں کا پینل بنایا جس میں پہلا نام حمید الله بھٹ کا رکھا گیا اور دوسرا محمود ہاشمی (ڈپٹی  ڈائریکٹر آل انڈیا ریڈیو )کا اور تیسرا نوید مسعود (ڈائریکٹر ڈیپارٹمنٹ آف ایجوکیشن )کا .اس پینل میں موجود باقی دونوں لوگ اس پر علمی اعتبار سے بھی فوقیت رکھتے تھے اور ایڈمنسٹریٹو تجربے کے اعتبار سے بھی .مگر ان پر اس کو ترجیح دی گئی .اور پھر دو سال کے بعد بغیر Recruitment Rules کے ڈائریکٹر کی Term Post کے Against اس کو Permanently ابزورو کر لیا گیا .اس PIL میں اسکے appointment اور absorption دونوں کو غیر قانونی بتایا گیا ہے اور اس عہدے پر سے 2005 میں اسکی گرفتاری کا بھی حوالہ دیا گیا ہے اور حمید الله بھٹ کو ترنت برطرف کرنے کی مانگ کی گئی ہے .جس کی کئی سماعتیں ہو چکی ہیں پہلے یہ جسٹس دیپک مشرا اور جسٹس سنجیو کے کھنا کی پنچ کے سامنے تھی اور انکے سپریم کورٹ چلے جانے کی وجہ سے اب دوسری دو رکنی بنچ کے سامنے ہے اور وکیل جناب ارجن ہرکولی (Shri Arjun Harkauli) ہیں اور امید ہے کہ بہت جلد حمید الله بھٹ کی قسمت کا ستارہ ڈوبنے والا ہے .

                                                                                                                                                      (سمیع الدین)
                                                                                                                                                      رابطہ عامہ سیل
نوٹ :اس بارے میں اور کچھ معلوم کرنا ہو تو پٹنہ میں پروفیسر لطف الرحمن صاحب کو 09835064584 پر یا دہلی میں جناب جاوید رحمانی کو 09210293686 پر فون کریں .
اور دستاویزوں کے معائنے کیلئے www.authorsanjuman.wordpress.com    اور www.cfess.blogspot.com  پر لاگ ان کریں.

Monday, September 19, 2011



بھٹ کی بر طرفی سے متعلق PIL کی اگلی سماعت 4 نومبر 2011 کو

اردو کونسل کے ڈائریکٹر حمید الله بھٹ کی بر طرفی سے متعلق  PIL کی سماعت14 ستمبر 2011 کو  جسٹس دیپک مشرا اور سنجیو کے کھنا کی بنچ کے سامنے تھی .اس میں جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن نے بھٹ کی اہلیت پر سوالیہ نشان قائم کیا اور اس  سے متعلق بد عنوانی کے معاملات کا حوالہ دیکر بھٹ کی برطرفی کا مطالبہ کیا ہے ،اس معاملے کے وکیل  جناب ارجن حرکاولی ہیں اور عدالت عالیہ نے اس مسئلے پر حکومت ہند ،وزارت براے فروغ انسانی وسائل اور قومی اردو کونسل سے جواب طلب کیا تھااور سماعت کی تاریخ پہلے 20 اپریل 2011 اور پھر 13 جولائی 2011 اور پھر14 ستمبر  2011 کو رکھی تھی  .جس پر حکومت نے اب جواب دیا ہے  اور  قومی اردو کونسل نےپہلے ہی  نہایت مبہم سا جواب داخل کیا تھا  جس میں غیر متعلق باتوں کی بھرمار سے عدالت کو گمراہ کرنے کی کوشش کی گئی ہے .حکومت ہند کےجواب میں بھی کوئی خاص بات نہیں بلکہ بھٹ کو عدالت کے رحم و کرم پر چھوڑ دیا گیا ہے اور اسے بچانے کی کوئی خاص کوشش نہیں کی گئی ہے . اس موقعے پر عدالت میں  جناب جاوید رحمانی موجود تھے اور انکے وکیل شری ارجن حرکاولی اورحکومت کے وکیل اور انکے ساتھ ملزم کے وکیل بھی موجود تھے   ،اگلی سماعت میں بھٹ کی عدالت کی طرف سے بر طرفی متوقع ہے کیوں کہ عدالت میںبھٹ  کے اور قومی اردو کونسل کے وکیل نے جو جوابات داخل کئے ہیں وہ انتہائی غلط اور گمراہ کن ہیں اور حکومت کے وکیل نے بھی اپنے جواب میں اسے بچانے کی کوشش نہیں کی ہے  . واضح رہے کہ  2005 میں ستمبر میں  بھٹ کو سی بی آئ(CBI) نے گرفتار کیا تھااور یہ اپنے سیاسی آقاؤں کی مدد سے اپریل   2009میں واپس آگیا جبکہ CBI میں اسکے خلاف مقدمہ ابھی چل ہی رہا ہے اور ایک ڈیپارٹمنٹل انکوائری بھی اسکے خلاف چل رہی ہے اور اب جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن کی   PIL اسکا خاتمہ بالخیر کرنے کیلئے آ گئی ہے

Thursday, July 14, 2011

بھٹ کی بر طرفی کا فیصلہ 14 ستمبر 2011 تک ٹلا(Next hearing on the PIL regarding removal of Bhat from NCPUL on 14 September 2011)


بھٹ کی بر طرفی کا فیصلہ 14  ستمبر 2011 تک ٹلا
اردو کونسل کے ڈائریکٹر حمید الله بھٹ کی بر طرفی سے متعلق  PIL کی سماعت آج جسٹس دیپک مشرا اور سنجیو کے کھنا کی بنچ کے سامنے تھی .اس میں جناب جاوید رحمانی اور پروفیسر لطف الرحمن نے بھٹ کی اہلیت پر سوالیہ نشان قائم کیا اور اس  سے متعلق بد عنوانی کے معاملات کا حوالہ دیکر بھٹ کی برطرفی کا مطالبہ کیا ہے ،اس معاملے کے وکیل  جناب ارجن حرکاولی ہیں اور عدالت عالیہ نے اس مسئلے پر حکومت ہند ،وزارت براے فروغ انسانی وسائل اور قومی اردو کونسل سے جواب طلب کیا تھااور سماعت کی تاریخ پہلے 20 اپریل 2011 اور پھر 13 جولائی 2011 کو رکھی تھی  .جس پر حکومت اور وزارت نے ابھی تک کوئی جواب نہیں دیا جبکہ قومی اردو کونسل نے کل نہایت مبہم سا جواب داخل کیا جس میں غیر متعلق باتوں کی بھرمار سے عدالت کو گمراہ کرنے کی کوشش کی گئی ہے .حکومت ہند کے وکیل وہاں موجود تھے.جنکو  عدالت نے ابھی تک جواب نہ داخل کرنے پر پھٹکارا اور چار ہفتے کے اندرہر حال میں  جواب داخل کرنے کا حکم دیا ،اور اگلی سماعت 14 ستمبر 2011 کو رکھی ،واضح رہے کہ اس موقعے پر عدالت میں ملزم حمید الله بھٹ اور جناب جاوید رحمانی بھی موجود تھے ،اگلی سماعت میں بھٹ کی عدالت کی طرف سے بر طرفی متوقع ہے کیوں کہ عدالت میںبھٹ کے اور قومی اردو کونسل کے وکیل نے جو جوابات داخل کئے ہیں وہ انتہائی غلط اور گمراہ کن ہیں واضح رہے کہ  2005 میں ستمبر میں ہی بھٹ کو سی بی آئ(CBI) نے گرفتار کیا تھا جب لکھنئو میں اردو کونسل کا میلہ چل رہا تھا اس ستبمبر میں جب بھٹ کی بحالی کو چیلنج کرنے والی  PIL کی سماعت ہے اس موقعے پر اردو کونسل کا کشمیر میں میلہ چل رہا ہوگا .شاید تاریخ اپنے آپ کو دوہرانے والی ہے اور اردو کا ایک بڑا ادارہ بد عنوانی کے داغ سے نجات پانے والا ہے ،